१२- क्षत्रिय १२- क्षत्रिय भारत भूमि के रणधीर राजपूत वीर। दुर्बल को रक्षक वो भक्षक सो भायो है।। एक मुक्तिकाज लाख-लाख बलिदान दिए। वो ही पराधीनता के पिंजर पुरायो है।। न्याय नीति…
१३- वैश्य १३- वैश्य ब्राह्मण क्षत्रिय शूद्र वर्ण को आधार वही। वैश्य वर्ण मरण के चरण तक आयो है।। वैश्य ने विसार दियो वैश्य धर्म को विचार। वाको धर्म कर्म सब स्वार्थ…
१४- शूद्र १४- शूद्र बड़े-बड़े पडे वहां शूद्रन की कथा कौन। शूद्र पे समुद्र दुःख दर्द को छवायो है।। धर्म भयो छुआछूत शूद्र भयो है अछूत। धर्म की आड में भूत धर्म…
१५- चातुर्वर्ण १५- चातुर्वर्ण ब्रह्मविद्यायुक्त वर्ण ब्राह्मण जो शीर्शरूप। हो गए विमुक्त वही उक्त अधिकार ते।। क्षत्रिय बाहुस्वरूप हीन पराधीन भये। मुक्ति के सुभक्त गिरे शक्ति के संस्कार ते।। वैश्य उदररूप वो…
१६- संगठन १६- संगठन जहां वर्ण चार वहां आज तो अपार भये। हिंदु-हिन्दुत्व में भेद-भाव को बढायो है।। आपस की फूट चली छूट मारकूट चली। विधर्मी की लूट चली गांठ को गंवायो…
१७- शुद्धि १७- शुद्धि खुले रखे द्वार धर्म छोड़ जानेवाले काज। आनेवाले काज दोष दीनो है अशुद्धि को।। अति मतिमन्द अंध धर्म अधिकारी भये। कुबुद्धि के धारी भये बेच मारी बुद्धि को।।…
१८- अधर्म-अंधकार १८- अधर्म-अंधकार धर्म गयो धरणी में आगयो अधर्मयुग। पाप परितापन में भारत बेजार था।। तांत्रिकों का तन्त्र-मन्त्र वाममार्ग का विहार। पूर्ण पोपलीला का प्रसार पारावार था।। दुष्ट को न दण्ड…
१९- न तस्य प्रतिमा अस्ति १९- न तस्य प्रतिमा अस्ति लोगों ने बनायी प्रभु प्रतिमा पूजनकाज। अपनी अपूर्णताएं उनमें लगाई है।। प्रतिमा को लगे भूख-प्यास-शीत-ताप लगे। सोने जगाने के लिए घण्टडी बनाई है।। काराणी कहत…
२०- कलिकाल २०- कलिकाल नेह भयो नष्ट अवशेष कष्ट क्लेश भयो। देश में विशेष भयो विष व्हेम-व्याल को।। धर्म दूर-दूर भयो अधर्म को पूर भयो। धूरत असुर भयो क्रूर कलिकाल को।। काराणी…
२१- बानी में भवानी है २१- बानी में भवानी है काले कर्मचारियों के काल के कमान जैसी। जुग की जबान रामबाण तेरी बानी है।। केते-केते कोटि पाप पाखण्डों के काटिबे को। तेरी बानी तेग ताको…
२२- दोन दयानन्द को एक दयानन्द तू २२- दोन दयानन्द को एक दयानन्द तू ब्रह्मचर्य पुष्ट तेरे देह का अदम्य तेज। वीर आर्य धर्म का प्रचण्ड मार्तण्ड तू।। काम क्रोध लोभ मोह मत्सर में मन्द अति। सारे…
२३- बोल-बाला २३- बोल-बाला धर्म को उठानेवाला अधर्म को ढानेवाला। आंधी को उड़ानेवाला ज्ञान का उजाला तू।। आप ही के आप वस्त्रालंकारें लुटानेवाला। कौपीन लगानेवाला नेता ही निराला तू।। आर्यवर आला प्रेम…