१५- चातुर्वर्ण

१५- चातुर्वर्ण ब्रह्मविद्यायुक्त वर्ण ब्राह्मण जो शीर्शरूप। हो गए विमुक्त वही उक्त अधिकार ते।। क्षत्रिय बाहुस्वरूप हीन पराधीन भये। मुक्ति के सुभक्त गिरे शक्ति के संस्कार ते।। वैश्य उदररूप वो…

१८- अधर्म-अंधकार

१८- अधर्म-अंधकार धर्म गयो धरणी में आगयो अधर्मयुग। पाप परितापन में भारत बेजार था।। तांत्रिकों का तन्त्र-मन्त्र वाममार्ग का विहार। पूर्ण पोपलीला का प्रसार पारावार था।। दुष्ट को न दण्ड…

१९- न तस्य प्रतिमा अस्ति

१९- न तस्य प्रतिमा अस्ति लोगों ने बनायी प्रभु प्रतिमा पूजनकाज। अपनी अपूर्णताएं उनमें लगाई है।। प्रतिमा को लगे भूख-प्यास-शीत-ताप लगे। सोने जगाने के लिए घण्टडी बनाई है।। काराणी कहत…

२३- बोल-बाला

२३- बोल-बाला धर्म को उठानेवाला अधर्म को ढानेवाला। आंधी को उड़ानेवाला ज्ञान का उजाला तू।। आप ही के आप वस्त्रालंकारें लुटानेवाला। कौपीन लगानेवाला नेता ही निराला तू।। आर्यवर आला प्रेम…

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