बुद्धि अर्थिका तन मन्दिर स्व देवता बुद्धि है जो अर्थिका।अद्भुत नृतन करती वस्त्रहीन हो जाती पूर्णतः।। 2/11।। (साभार आप्ता)
चक्कर कोल्हू के बैल की आंख पर पट्टी गले में जुआ होता है।बैल से गया बीता बिना पट्टी जुआ चक्कर काटता है आदमी।। 2/9।। (साभार आप्ता)
व्यवस्था व्यवस्थाओं में बंधकर ही आदमी पापी-पुण्यात्मा होता है। मैंने तो किसी भी व्यवस्था के कोई कपड़े नहीं पहने हैं।। 2/8।। (साभार आप्ता)