२४- तिहारी बलिहारी है

२४- तिहारी बलिहारी है योगी विश्वद्रष्टा सत्यतत्व को सुस्रष्टा तू ही। तू युगावतार तू नैष्ठिक ब्रह्मचारी है।। तेरी सत्यवृष्टि दृष्टि सृष्टि ही अनेरी तेरी। तेरी वज्र काय तू ही वज्र…

२७- निराकार ईश्वर से जीवन को जोड़ा है

२७- निराकार ईश्वर से जीवन को जोड़ा है सोती आर्यजाति को झंझोड के जगानेवाले। प्रतिमा के पाषाण-पूजा से मुख मोड़ा है।। भूत-प्रेत तन्त्र गण्डा-ताविजों को तोड़ा तूने। जंत्र-मन्त्र ज्योतिष का…

२९- झंडाधारी

२९- झंडाधारी आया झंडाधारी वेद धर्म का उडाया झंडा। मंत्र ओम्कार तें जगत को जगायो है।। पाप-ताप, क्लेश-द्वेष, जेर-जुल्म जारिबे को। कहा महिमण्डल पे महानल आयो है।। कृण्वन्तो विश्वमार्यम् एक…

३२- तेज का मिनारा

३२- तेज का मिनारा कैते महिपतियों को आर्यत्व की दीनी आन। कैते कैते मानियों के मान को उतारा है।। तेरी अप्रतिम तपश्चर्या की तेजसधारा। तेजस्वी चारित्र्यजैसा शुक्र का सितारा है।।…

३४- पाखण्ड खण्डनी पताका

३४- पाखण्ड खण्डनी पताका हरिद्वार धाम कुम्भमेले के झमेले बीच। भारत की जनता अपार जब आई है।। मोटे-मोटे साधू-संत संन्यासी महन्त आए। डेरा-तम्बू डारे केती छावनी छवाई है।। सभा-समूहों में…

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