१८- अधर्म-अंधकार March 20, 2020 By Arun Aryaveer Download १८- अधर्म-अंधकार धर्म गयो धरणी में आगयो अधर्मयुग। पाप परितापन में भारत बेजार था।। तांत्रिकों का तन्त्र-मन्त्र वाममार्ग का विहार। पूर्ण पोपलीला का प्रसार पारावार था।। दुष्ट को न दण्ड था उद्दण्ड को घमण्ड था। प्रचण्ड खण्ड-खण्ड में पाखण्ड का प्रचार था।। वैर था विकार था धिक्कार भरा भारत में। खड़ा द्वार-द्वार अविद्या का अन्धकार था।।१८।। ~ दयानन्द बावनी स्वर : ब्र. अरुणकुमार “आर्यवीर” ध्वनि मुद्रण : कपिल गुप्ता, मुंबई