१२- क्षत्रिय March 20, 2020 By Arun Aryaveer Download १२- क्षत्रिय भारत भूमि के रणधीर राजपूत वीर। दुर्बल को रक्षक वो भक्षक सो भायो है।। एक मुक्तिकाज लाख-लाख बलिदान दिए। वो ही पराधीनता के पिंजर पुरायो है।। न्याय नीति नियम नरेश में न रहे शेष। फैशन के फेर-फेर फन्द में फसायो है।। नहीं नेक टेक एक वर्ण में विवेक रेख। देख देख दिल दयानन्द को दुखायो है।।१२।। ~ दयानन्द बावनी स्वर : ब्र. अरुणकुमार “आर्यवीर” ध्वनि मुद्रण : कपिल गुप्ता, मुंबई