दयानन्द के वीर बाँके सिपाही दयानन्द के वीर बाँके सिपाही, हलचल मचाने चले ऽऽ तूफान लाने चले।। आलस की निद्रा में जो सो रहे हैं। भाग्य की रेखा को जो रो रहे हैं। अवसर को…
चलो न मानव अकड़-अकड़ के “थोडी तेरी उमर है” चलो न मानव अकड़-अकड़ के, थोड़ी तेरी उमर है। रूप का मान, धन अभिमान, मन में अहं भरी है।। टेक।। भीतर-भीतर ओऽम् जुड़ो तुम, सहज ज्ञान…
ब्रह्म मेरा घर है “चतुर्वेदी” (तर्ज :- तुम्ही मेरी मंदिर) ब्रह्म मेरा घर है, ब्रह्म मेरा दर है, ब्रह्म रास्ता है। वेद की दृष्टि से, देखें तो समझें, ब्रह्म हर निशां है।। बहुत युग…
ब्रह्म से बिछडकर “निकटतम का द्वैत” (तर्ज :- कहां जा रहा है तू ऐ जानेवाले) ब्रह्म से बिछडकर कहां रह सकेगा। यहां रह सकेगा, न वहां रह सकेगा।। टेक।। सदा साथ है तेरे…
बेला अमृत गया प्रातःगान बेला अमृत गया, आलसी सो रहा, बन अभागा। साथी सारे जगे तू न जागा।। झोलियाँ भर रहे भाग्य वाले, लाखों पतितों ने जीवन सम्भाले। रंक राजा बने, भक्ति रस…
जो जागत है सो पावत है प्रातःगान उठ जाग मुसाफिर भोर भई,अब रैन कहाँ जो सोवत है?जो सोवत है सो खोवत है,जो जागत है सो पावत है।। टुक नींद से अँखिया खोल जरा,और अपने प्रभु से…
ब्रह्म से बिछडकर कहां रह सकेगा..?? ब्रह्म से बिछडकर कहां रह सकेगा।यहां रह सकेगा, न वहां रह सकेगा।। टेक।। सदा साथ है तेरे सदा साथ रहेगा।तू कब तक सच से यूं अनजान रहेगा।अज्ञान अपना न क्या…
साथी सारे जगे तू न जागा बेला अमृत गया, आलसी सो रहा, बन अभागा।साथी सारे जगे तू न जागा।। झोलियाँ भर रहे भाग्य वाले, लाखों पतितों ने जीवन सम्भाले।रंक राजा बने, भक्ति रस में सने, कष्ट…
ब्रह्म युजित उन्मुक्त तू हो जा (तर्ज :- दर्शन दो घनश्याम) ब्रह्म युजित उन्मुक्त तू हो जा धरती वासी रे।। टेक।। देश देश ना सीमा तेरी, ब्रह्माण्ड रागमय वीणा तेरी।फैल बिखर जा अन्तस्वासी, दिव्य आकाशी रे।।…
बढ़ता चल आर्य वीर दल बढ़ता चल बढ़ता चल आर्य वीर दल।सत्य मार्ग पर चला रुके न एक पल।। टेक।। प्रेम का संचार परस्पर सदा रहे।द्वेष भाव लेश मात्र भी जुदा रहे।मन रहे पवित्र कि…
आर्य वीर दल रहा रहेगा प्राण आर्यों का आर्य वीर दल रहा रहेगा प्राण आर्यों का।इससे ही होना है नव निर्माण आर्यों का।। टेक।। गुरुवर दयानन्द का इससे गहरा नाता है।आर्यवीर दल पुनः जागरण शंख बजाता है।।लेखराम का…
और किसका मैं पकडुँ सहारा और किसका मैं पकडुँ सहारा।स्वामी तेरे सिवा कोई नहीं है।। टेक।। जिन्दगी को मैं खोता रहा यूँ।गफलत में मैं सोता रहा यूँ।कितनी गुजरी हैं दिन और रातें।नीन्द आँखों से धोयी…