चलो न मानव अकड़-अकड़ के April 10, 2020 By Arun Aryaveer Download “थोडी तेरी उमर है” चलो न मानव अकड़-अकड़ के, थोड़ी तेरी उमर है। रूप का मान, धन अभिमान, मन में अहं भरी है।। टेक।। भीतर-भीतर ओऽम् जुड़ो तुम, सहज ज्ञान की ओर बढ़ो तुम। मोक्ष यहीं पे सुलभ है। रूप का मान…।। 1।। सबको भाए रंग रसीले, कोई न चाहे दर्द हठीले। तप की राह कठिन है। रूप का मान…।। 2।। पुत्र के धन के और ये यश के, भाव सजीले मोह नशीले। पल-पल की फिसलन है। रूप का मान…।। 3।।