नील गगन के नीचे नील गगन के नीचे, तुम सब मिलकर गाओ। देश की खातिर जान भी देने से ऽ मत घबराओ आओ। इसके अर्पण तन-मन-धन, सब कुछ अपना लुटाओ।। 1।। भारत के तुम…
नहीं आज तक किसी ने नहीं आज तक किसी ने, तेरा मुकाम पाया। हर जा पे जाके देखा, तू कहीं नजर न आया।। ये चाँद और सितारे, हर-दम ये कह रहे हैं। हर शय में…
ना मैं यश चाहूं “ब्रह्म-भाव” (तर्ज :- ना मैं धन चाहूं, ना रतन चाहूं) ना मैं यश चाहूं, ना मैं वित्त चाहूं, ना मैं मद चाहूं। स्वयं में ब्रह्म का भाव भर जाए, मैं…
मुक्ति का मन्त्र दो मुक्ति का मन्त्र दो, आत्मा स्वतन्त्र हो। सत्य बोलने से हम रुके नहीं ऽ साथी हम न्याय के, आगे अन्याय के। आर्य बालकों के सर झुके नहीं।। टेक।। तुम सबके…
मिले शान्ति वह प्रभुवर हमको मिले शान्ति वह प्रभुवर हमको।। टेक।। जो रवि किरणों में मुस्काए। अन्तरिक्ष को जो महकाए। वसुधा पर सौरभ बन छाए। व्यापक रह जल के स्रोतों में। करें सुखी जीवन भर…
महानाश की ज्वालाएँ महानाश की ज्वालाएँ धरती पर दौड़ी आ रही हैं। आर्य समाज तुम्हें बढ़ना है, मानवता चिल्ला रही है।। इस धरती पर कौन बढ़ेगा ? हमें बता दो ऽ ऽ ऽ…
कुछ पल का है जीना कुछ पल का है जीना, बस सीखा खाना पीना। कुछ ओर भी तू कर ले, कि पाए ब्रह्म धाम।। टेक।। पाया ज्ञान वेद से हमने, ऋत को भूल न जाना।…
कृण्वन्तो विश्वमार्यम् एक साथ उच्चार करें, हम ऐसा व्यवहार करें। एक मन्त्र का घोष करें, कृण्वन्तो विश्वमार्यम्।। टेक।। आज नहीं प्राचीन समय से वेद हमारा साथी। दूर दूर तक फैलाई थी वैदिक…
कभी न भूलो ओऽम् तुम “चयन हक” कभी न भूलो ओऽम् तुम। कि ओऽम् हमारा आधार है।। टेक।। ओऽम् है विराट भी, ओऽम् है प्रकाश भी। ओऽम् ही है दिव्यता, ओऽम् ही अस्तित्वता। ओऽम् सा…
जननी जन्मभूमि स्वर्ग से महान जजनी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी जननी जन्मभूमि, स्वर्ग से महान है। इसके वास्ते ये तन है, मन है, धन है प्राण है। तन मन धन प्राण है।। टेक।। इसके कण कण…
इसलिए ओऽम् से लगन लगा “ओ ब्रह्म ज्योति के परवाने” (तर्ज :- इतना न मुझसे तू प्यार बढ़ा) इसलिए ओऽम् से लगन लगा। कि तू अल्पज्ञ है नन्हा सा।। ज्ञान तू अपना रे खूब बढ़ा।…
ईश्वर से संग जोड़ मानव ईश्वर से संग जोड़ मानव, ईश्वर से संग जोड़। विषयों से मुख मोड़ मानव, विषयों से मुख मोड़।। टेक।। प्रातः सायं संध्या करले, वेदज्ञान जीवन में भरले। शुभ कर्मों को…