050 Ma No Mahantamuta

मूल प्रार्थना मा न॑स्तो॒के तन॑ये॒ मा न॑ आ॒यौ मा नो॒ गोषु॒ मा नो॒ अश्वे॑षु रीरिषः। वी॒रान्मा नो॑ रुद्र भामि॒तो व॑धीर्ह॒विष्म॑न्तः॒ सद॒मित्त्वा॑ हवामहे॥५१॥ऋ॰ १।८।६।३ व्याख्यान—“मा, नः , तोके” कनिष्ठ, मध्यम और…

051 Udgaatev Shakune

मूल प्रार्थना उ॒द्गा॒तेव॑ शकुने॒ साम॑ गायसि ब्रह्मपु॒त्रइ॑व॒ सव॑नेषु शंससि। वृषे॑व वा॒जी शिशु॑मतीर॒पीत्या॑ स॒र्वतो॑ नः॒ शकुने भ॒द्रमा व॑द वि॒श्वतो॑ नः॒ शकुने॒ पुण्य॒मा व॑द॥५२॥ऋ॰ २।८।१२।२ आ॒वदँ॒स्त्वं श॑कुने भ॒द्रमा व॑द तू॒ष्णीमासी॑नः सुम॒तिं चि॑किद्धि…

052 Sah Na Vavatu

॥ओ३म् तत्सत्परमात्मने नमः॥ ॥अथ द्वितीयः प्रकाशः॥ ओ३म् स॒ह ना॑ववतु स॒ह नौ॑ भुनक्तु। स॒ह वी॒र्य्यं॑ करवावहै। ते॒ज॒स्वि ना॒वधी॑तमस्तु॒ मा वि॑द्विषा॒वहै॑। ओ३म् शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥१॥ —तैत्तिरीयारण्यके ब्रह्मानन्दवल्ली प्रपा॰ १०। प्रथमानुवाकः १॥ व्याख्यान—हे…

053 Saparyagaat Shukram

मूल स्तुति स पर्य॑गाच्छु॒क्रम॑का॒यमव्र॒णम॑स्नावि॒रꣳ शु॒द्धमपा॑पविद्धम्। क॒विर्म॑नी॒षी प॑रि॒भूः स्व॑य॒म्भूर्या॑थातथ्य॒तोऽर्था॒न् व्यदधाच्छाश्व॒तीभ्यः॒ समा॑भ्यः॒॥२॥यजुर्वेद अध्याय ४०। मन्त्र ८ व्याख्यान—“सः, पर्यगात्” वह परमात्मा आकाश के समान सब जगह में परिपूर्ण (व्यापक) है। “शुक्रम्” सब जगत्…

054 Drite Drinha Ma

मूल प्रार्थना दृते॒ दृ ह॑ मा मि॒त्रस्य॑ मा॒ चक्षु॑षा॒ सर्वा॑णि भू॒तानि॒ समी॑क्षन्ताम्। मि॒त्रस्या॒हं चक्षु॑षा॒ सर्वा॑णि भू॒तानि॒ समी॑क्षे। मि॒त्रस्य॒ चक्षु॑षा॒ समी॑क्षामहे॥३॥यजु॰ ३६।१८ व्याख्यान—हे अनन्तबल महावीर ईश्वर! “दृते” हे दुष्टस्वभावनाशक विदीर्णकर्म अर्थात्…

055 Tadevagnish Tadadityash

मूल स्तुति तदे॒वाग्निस्तदा॑दि॒त्यस्तद्वा॒युस्तदु॑ च॒न्द्रमाः॑। तदे॒व शु॒क्रं तद् ब्रह्म॒ ताऽआपः॒ स प्रजाप॑तिः॥४॥ व्याख्यान—जो सब जगत् का कारण एक परमेश्वर है, उसी का नाम अग्नि है (ब्रह्म ह्यग्निः *१ —शतपथे)—सर्वोत्तम, ज्ञानस्वरूप और…

056 Richam Vaacham Prapadye

मूल प्रार्थना ऋचं॒ वाचं॒ प्र प॑द्ये॒ मनो॒ यजुः॒ प्र प॑द्ये॒ साम॑ प्रा॒णं प्र प॑द्ये॒ चक्षुः॒ श्रोत्रं॒ प्र प॑द्ये॒। वागोजः॑ स॒हौजो॒ मयि॑ प्राणापा॒नौ॥५॥ यजुः॰ ३२।१, यजु॰ ३६।१ व्याख्यान—हे करुणाकर परमात्मन्! आपकी…

057 Sa No Bandhur Janita

मूल स्तुति स नो॒ बन्धु॑र्जनि॒ता स वि॑धा॒ता धामा॑नि वेद॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑। यत्र॑ दे॒वाऽअ॒मृत॑मानशा॒नास्तृ॒तीये॒ धाम॑न्न॒ध्यैर॑यन्त॥६॥यजु॰ ३२। १० व्याख्यान—वह परमेश्वर हमारा “बन्धुः” दुःखनाशक और सहायक है तथा “जनिता” सब जगत् तथा हम…

058 Yato Yatah Samihase

मूल प्रार्थना यतो॑यतः स॒मीह॑से॒ ततो॑ नो॒ऽअभ॑यं कुरु। शं नः॑ कुरु प्रजाभ्योऽभ॑यं नः प॒शुभ्यः॑॥७॥यजु॰ ३६।२२ व्याख्यान—हे परमेश्वर! दयालो! जिस-जिस देश से आप “समीहसे” सम्यक् चेष्टा करते हो उस-उस देश से हमको…

059 Vedahmetam Purusham Mahantam

मूल स्तुति वेदा॒हमे॒तं पुरु॑षं म॒हान्त॑मादि॒त्यव॑र्णं॒ तम॑सः प॒रस्ता॑त्। तमे॒व वि॑दि॒त्वाति॑ मृ॒त्युमे॑ति॒ नान्यः पन्था॒ विद्य॒तेऽय॑नाय॥८॥यजु॰ ३१।१८ व्याख्यान—सहस्त्रशीर्षादि विशेषणोक्त पुरुष सर्वत्र परिपूर्ण (पूर्णत्वात्पुरिशयनाद्वा पुरुष इति निरुक्तोक्तेः) है, उस पुरुष को मैं जानता हूँ,…

060 Tejosi Tejo Mayi

मूल प्रार्थना तेजो॑ऽसि॒ तेजो॒ मयि॑ धेहि। वी॒र्यमसि वी॒र्यं मयि॑ धेहि॒। बल॑मसि॒ बलं॒ मयि॑ धे॒ह्योजो॒ऽस्योजो॒ मयि॑ धेहि। म॒न्युर॑सि म॒न्युं मयि॑ धेहि॒। सहो॑ऽसि॒ सहो॒ मयि॑ धेहि॥९॥यजु॰ १९।९ व्याख्यान—हे स्वप्रकाश! अनन्ततेज! आप अविद्यान्धकार…

061 Paritya Bhutani

मूल स्तुति प॒रीत्य॑ भू॒तानि॑ प॒रीत्य॑ लो॒कान् प॒रीत्य॒ सर्वाः॑ प्र॒दिशो॒ दिश॑श्च। उ॒प॒स्थाय॑ प्रथम॒जामृ॒तस्या॒त्मना॒त्मान॑म॒भि सं वि॑वेश॥१०॥यजु॰ ३२।११ व्याख्यान—सब भूत आकाश और प्रकृति से लेके पृथिवीपर्यन्त सब संसार में वह परमेश्वर व्याप्त होके…

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