भोगों को भोगने में कुछ दोष भोगों को भोगने में कुछ दोष प्रथम दोष : भोगों को भोगने से विषयभोग की इच्छा न्यून नहीं होती अपितु पूर्व की अपेक्षा अतितीव्र हो जाती है, विषयसेवन से कोई…
कर्मफल विवरण कर्मफल विवरण (1) नष्ट हो जाना = इन कर्मों का फल मुक्ति से लौटकर प्राप्त होना अर्थात् वे कर्म मोक्ष रूप फल पूरा होनले तक नष्ट (लुप्त) रहेंगे। (2) साथ…
प्रवाह से अनादि संसारचक्र प्रवाह से अनादि संसारचक्र प्रमाण :- “सत्त्वरजस्तमसां साम्यावस्था प्रकृतिः प्रकृतेर्महान्महतोऽहंकारोऽहंकारात्पञ्चतन्मात्राण्युभयमिन्द्रियं तन्मात्रेभ्यः स्थूलभूतानि पुरुष इति पञ्चविंशतिर्गणः” (सांख्यदर्शन 1/61) प्रमाण :- ओ3म् शतं तेऽयुतं हायनान् द्वे युगे त्राीणि चत्वारि कृण्मः। इन्द्राणि विश्वे…
यम-नियम यम अहिंसासत्यास्तेयब्रह्मचर्यापरिग्रहा यमाः। (यो.द. 2/3) अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, और अपरिग्रह ये पांच यम हैं जो “सार्वभौमा महाव्रतम्” कहलाते हैं। अहिंसा :- शरीर वाणी तथा मन से सब काल में,…
योगाभ्यास न करने से हानियां योगाभ्यास न करने से हानियां योगाभ्यास न करनेवाला व्यक्ति – अपने व्यवहार से अन्यों को दुःखी करता है। कृतघ्न और महामूर्ख होता है। मन-इन्द्रियों का दास होता है। वेद और…
योगाभ्यास का महत्व एवं लाभ योगाभ्यास का महत्व एवं लाभ मेधा बुद्धि की प्राप्ति। तीव्र स्मृति की प्राप्ति। एकाग्रता की प्राप्ति। मनादि इन्द्रियों पर नियन्त्रण होना। कुसंस्कारों का नाश और सुसंस्कारों का उदय होना। “मैं…
सत्यासत्य परीक्षा की कसौटियां सत्यासत्य परीक्षा की कसौटियां जो-जो ईश्वर के गुण-कर्म-स्वभाव और वेदों से अनुकूल हो, वह-वह ‘सत्य’ तथा उससे विरुद्ध असत्य है। जो-जो सृष्टिक्रम से अनुकूल वह-वह ‘सत्य’ और जो-जो सृष्टिक्रम से…
कर्म कर्म कर्म की परिभाषा – मन वाणी और शरीर से जीवात्मा जो विशेष प्रकार की क्रियाएं करता है, उसे ‘कर्म’ कहते हैं। जैसे- यज्ञ करना, सत्य बोलना, दान देना, सब…
विवेकख्याति प्राप्त योगी की सात प्रकार की प्रज्ञा विवेकख्याति प्राप्त योगी की सात प्रकार की प्रज्ञा परिज्ञातं हेयं नास्य पुनः परिज्ञेयमस्ति। जो छोड़ने योग्य है मैंने उसे पूर्णरूपेण जान लिया है। उसका जानने योग्य कोई भाग शेष नहीं…
वास्तविक गुरु के लक्षण वास्तविक गुरु के लक्षण वेद और वेदानुकूल ऋषिकृत ग्रन्थों के पठन-पाठन को मुक्ति का साधन माननेवाला हो। सत्यमानी, सत्यवादी, सत्यकारी हो। पुत्रैषणा, वित्तैषणा और लोकैषणा का त्यागी हो। ईश्वर, जीव…
ईश्वरभक्ति से होनेवाले लाभ ईश्वरभक्ति से होनेवाले लाभ पर्वत के समान कष्ट आने पर भी नहीं डरता, सबको सहन कर जाता है। प्रमाणों से सिद्ध सत्य को ग्रहण करने के लिए उद्यत रहता है,…
चन्द्रशेखर वेंकटरमन चन्द्रशेखर वेंकटरमन रमन का जन्म नवम्बर 1888 में तमिलनाडु के त्रिचिनापल्ली नामक नगर में हुआ था। आपके पिता एक अध्यापक थे। आपकी माता का नाम पार्वती अय्यर था। आपका प्राथमिक…