प्रवाह से अनादि संसारचक्र August 14, 2019 By Arun Aryaveer प्रवाह से अनादि संसारचक्र प्रमाण :- “सत्त्वरजस्तमसां साम्यावस्था प्रकृतिः प्रकृतेर्महान्महतोऽहंकारोऽहंकारात्पञ्चतन्मात्राण्युभयमिन्द्रियं तन्मात्रेभ्यः स्थूलभूतानि पुरुष इति पञ्चविंशतिर्गणः” (सांख्यदर्शन 1/61) प्रमाण :- ओ3म् शतं तेऽयुतं हायनान् द्वे युगे त्राीणि चत्वारि कृण्मः। इन्द्राणि विश्वे देवास्तेऽनु मन्यन्तां हृणीयमानाः। (अथर्ववेद 8/2/21) अयुत = 10, 000 (दस हजार) सैकड़े पर 2, 3, 4 लिखने पर कल्पकाल 4,32,00,00,000 वर्ष निकलता है। (संवत 2047 का 10 वां कालचक्र पृ-2) Leave a Reply Cancel replyYour email address will not be published. Required fields are marked *Comment * Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.