‘‘अस्तित्व-पहचान’’

आइडेंटिटी का नाम ‘‘अस्तित्व पहचान’’है । ‘‘अस्तित्व पहचान’’का सटीक होना राष्ट्र, उद्योग, समाज, परिवार आदि की उन्नति के लिए आवश्यक है । ‘‘अस्तित्व पहचान संकट’’(आइडेंटिटी क्राइसिस) पैदा हो जाने पर…

वेदों का वेद- “ब्रडाब्रनि प्रबंधन”

इन्द्र ब्रह्म- सर्वगुण आभार शुभ ही शुभ । त्रातारम् इन्द्र- शुभ ही शुभ पालन-लालन है जिसके, अवितारम् इन्द्र- बोध, प्रतिबोध, अस्वप्न, अद्रवता, जागृति, इन्द्रिय चैतन्यता (चेतन अवचेतन स्वस्थता) – उत्तम…

त्र्यायुष प्रबन्धन

हर कार्य की मुख्य रूप में तीन अवस्थाएं होती हैं। एक बाल्यावस्था, दूसरी यौवनावस्था, तीसरी वृद्धावस्था। इन तीन अवस्थाओं के नियमन, संचालन का प्रबन्धक त्र्यायुष कहलाता है। इन तीन अवस्थाओं…

स्वधा प्रबन्धन

अति आत्म साधना का एक समुच्चय ”स्वधा“”स्वदा“संबंधि भी है। वह इस प्रकार है- सप्त अर्चना गृहनियन्ता विश्वे देवा बलधा बलदा ओजधा ओजदा ऋतधा ऋतदा शृतधा शृतदा अमृतधा अमृतदा स्वधा स्वदा…

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