नागार्जुन August 12, 2019 By Arun Aryaveer नागार्जुन प्राचीन भारत ने गणित तथा ज्योतिष् के क्षेत्रों में नए-नए संशोधन करके विश्व की ज्ञान सम्पदा में अभिवृद्धि करके उसे समृद्ध बनाया है। इतना ही नहीं अपितु रसायन शास्त्र जैसे अत्यन्त आधुनिक क्षेत्र में भी अभूतपूर्व योगदान प्रदान किया है। नागार्जुन ऐसे ही एक प्रसिद्ध रसायन शास्त्री थे। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में पैरी नदी के तट पर बसे बालूका ग्राम में नागार्जुन का जन्म हुआ था। सातपुड़ा की सुरम्य पर्वत श्रृंखलाओं की तलहटी में स्थित यह बालू का ग्राम नागार्जुन की जन्मभूमि था। आपके पिता कौंडिल्य गोत्र में जन्मे हुए दक्षिणात्य ब्राह्मण थे। वे अत्यन्त सात्विक शिवभक्त एवं कर्मकांडी सज्जन थे। बालक नागार्जुन जन्म से ही अत्यन्त प्रभावशाली था। इसलिए अतीव शीघ्रता से आपने वेद-वेदांगो का अभ्यास पूर्ण कर लिया। बड़े होकर आप श्रीपुर- जो वर्तमान में सिरपुर नाम का मात्र गांव ही रह गया है, के विद्यालय में अभ्यास करने गए थे। यह बात वि.सं. 57 अर्थात् ईसा की प्रथम शताब्दि की है। उस समय सिरपुर महाकौशल की राजधानी थी। धन-धान्य से समृद्ध इस नगर में एक विश्वविद्यालय भी था, जहां देश-विदेश के विद्यार्थी अभ्यास करने आते थे। नागार्जुन ने यहां बौद्ध धर्म का अभ्यास किया और बौद्ध धर्म की दीक्षा भी ली। आपकी प्रभावशाली प्रतिभा के कारण इसी विश्वविद्यालय में अभ्यास पूर्ण करने के बाद अध्यापक के रूप में नागार्जुन अध्ययन कार्य करने लगे। इस समय में महाकौशल में भयंकर अकाल पड़ा। बारह वर्षों तक वर्षा न होने के कारण प्रजा भूख से मरने लगी। तब यहां के राजा आर्यदेव ने नागार्जुन से इस समस्या को हल करने के लिए सुझाव मांगा था। क्योंकि नागार्जुन रसायनशास्त्री थे, आपने इस समस्या पर गम्भीरता पूर्वक विचार करना प्रारम्भ किया। आप कुछ दिनों के लिए एकान्तवास में चले गए। एकान्तवास के कुछ दिनों पश्चात् आपने राजा को संदेश भिजवाया कि उनके राज्य में जितना तांबा इकट्ठा हो सकता है उसे वे आश्रम में भेज दें। राजा ने नागार्जुन के संदेशानुसार किया। कुछ दिनों पश्चात् नागार्जुन ने जब राजा को आश्रम में बुलाया तब आपके समक्ष सोने का विशाल ढेर हो गया था। नागार्जुन ने राजा को कहा कि वे इस सोने को ले जाकर अन्य देशों में बेचकर अन्न खरीदकर प्रजा में बांटने का कार्य करें। इस प्रकार नागार्जुन ने रासायनशास्त्र की अपनी विशेषता के आधार पर भीषण अकाल की समस्या का समाधान किया। यह तो निश्चित है कि नागार्जुन एक महान वैज्ञानिक थे। आपने अनेक निम्न श्रेणी के (अल्पमूल्य वाले) धातुओं को सोने में परिवर्तन करने की पद्धति का संशोधन किया था। आपके रचे हुए ’रसहृदय’ नामक ग्रंथ में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है। नागार्जुन ने आयुर्वेदाचार्य सुश्रुत द्वारा रचित ’सुश्रुतसंहिता’ का संपादन कर उसमें नए अध्याय बढ़ाए थे। आपके रसायन शाó के क्षेत्र में रचित मुख्य गं्रथ इस प्रकार हैं -1. रस हृदय 2. रस रत्नाकर 3. रसेन्द्र मंगल। चिकित्सा के क्षेत्र में भी आपका योगदान उल्लेखनीय है। इस क्षेत्र में आपके मुख्य ग्रंथ इस प्रकार हैं- 1. आरोग्य मंजरी, 2. कक्ष कन्नतंत्र, 3. योगसार, 4. योगाष्टक। आपने पारे का अविष्कार किया। उसमें से भस्म बनाने की पद्धति को भी ढूंढ लिया। आप मानते थे कि धातुओं की भस्म का यदि सेवन किया जाए तो शरीर सदा रोगमुक्त रह सकता है। नागार्जुन एक महान दार्शनिक भी थे। आपका दर्शन शून्यवाद के नाम से प्रसिद्ध हुआ। आपने वैदिक और बौद्ध दर्शन में समन्वय करने का भी प्रयास किया है। Leave a Reply Cancel replyYour email address will not be published. Required fields are marked *Comment * Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.