ब्रह्म आह्वान से चतुः आधान “आह्वान-पुकार-स्वीकार” ब्रह्म आह्वान से चतुः आधान। अन्न बल वेग व विज्ञान।। टेक।। उच्च निम्न मध्यम पुकारते हैं ब्रह्म।। 1।। यात्री व मंझिल करम पुकारते हैं ब्रह्म।। 2।। संघर्षरत या निवास…
ना मैं यश चाहूं “ब्रह्म-भाव” (तर्ज :- ना मैं धन चाहूं, ना रतन चाहूं) ना मैं यश चाहूं, ना मैं वित्त चाहूं, ना मैं मद चाहूं। स्वयं में ब्रह्म का भाव भर जाए, मैं…
सृष्टि के कण-कण में “ब्रह्म-पताका” हेऽ सृष्टि के कण-कण में, प्रभु का प्यार पगे। जनम से लेके, मरण तलक रे, मानव समझ न सके।। टेक।। हर कुछ उसका साधन बना है। इतनी पताकाएं, जगह-जगह…
पर उपकार धर्म शृंगार “ब्रह्म निकटतम” पर उपकार धर्म शृंगार, जीवन का आधार है। सुख जीवन पूर्व हैं तो सुख ही जीवन पार है।। टेक।। सत्संग करते पढ़ते पढ़ते जीवन समृद्ध हो गया। गहन…
जिन्दगी पलाश ही पलाश है “ब्रह्म तराश” प्रभाती सूरज का रंग कितना पलाश है। हर उगन कितनी-कितनी पाश है।। 1।। ब्रह्म से जुड़कर के तू देख जरा। जिन्दगी पलाश ही पलाश है।। 2।। सारी दीवारें…
कुछ पल का है जीना “सम अनुभूति” कुछ पल का है जीना, बस सीखा खाना पीना। कुछ ओर भी तू कर ले, कि पाए ब्रह्म धाम।। टेक।। पाया ज्ञान वेद से हमने, ऋत को भूल…
साधक रहा हूं मैं साधक ही रहूंगा “साधक” ऐ ब्रह्मानन्द अपने निकटतम कर ले। साधक रहा हूं मैं साधक ही रहूंगा।।टेक।। धन-दौलत लोगों नें अपार है जोड़ी। खुद को किया छोटा, रह गए बस कौड़ी। हुई भूल…