087 Wishwakarma Advihaya

मूल स्तुति वि॒श्वक॑र्मा॒ विम॑ना॒ऽ आद्विहा॑या धा॒ता वि॑धा॒ता प॑र॒मोत स॒न्दृक्। तेषा॑मि॒ष्टानि॒ समि॒षा म॑दन्ति॒ यत्रा॑ सप्तऽऋ॒षीन् प॒रऽ एक॑मा॒हुः॥४०॥ यजु॰ १७।२६ व्याख्यान—हे सर्वज्ञ, सर्वरचक ईश्वर! आप “विश्व-कर्मा” विविध जगदुत्पादक हो तथा “विमनाः” विविध…

088 Chatuh Sraktir Nabhih

मूल प्रार्थना चतुः॑ स्त्रक्ति॒र्नाभि॑र्ऋ॒तस्य॑ स॒प्रथाः॒ स नो॑ वि॒श्वायुः॑ स॒प्रथाः॒ स नः॑ स॒र्वायुः॑ स॒प्रथाः॑। अप॒ द्वेषो॒ऽअप॒ ह्वरो॒ऽन्यव्र॑तस्य सश्चिम॥४१॥ —यजुः॰ ३८।२० व्याख्यान—हे महावैद्य! सर्वरोगनाशकेश्वर! चार कोनेवाली नाभि (मर्मस्थान) “ऋतस्य” ऋत [रस] की…

089 Yo Nah Pita

मूल स्तुति यो नः॑ पि॒ता ज॑नि॒ता यो वि॑धा॒ता धामा॑नि॒ वेद॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑। यो दे॒वानां॑ नाम॒धा एक॑ ए॒व तꣳस॑म्प्र॒श्नं भुव॑ना यन्त्य॒न्या॥४२॥ यजु॰ १७।२७ व्याख्यान—हे मनुष्यो! जो अपना “पिता” (नित्य पालन करनेवाला)…

090 Yajjagrato

मूल प्रार्थना यज्जाग्र॑तो दू॒रमु॒दैति॒ दैवं॒ तदु॑ सु॒प्तस्य॒ तथै॒वैति॑। दू॒र॒ङ्ग॒मं ज्योति॑षां॒ ज्योति॒रेकं॒ तन्मे॒ मनः॑ शि॒वस॑ङ्कल्पमस्तु॥४३॥ यजु॰ ३४।१ व्याख्यान—हे धर्म्यनिरुपद्रव परमात्मन्! मेरा मन सदा “शिवसंकल्पम्” धर्म-कल्याणसङ्कल्पकारी ही आपकी कृपा से हो, कभी…

091 Na Tam Vidatha

मूल स्तुति न तं वि॑दाथ॒ य इ॒मा ज॒जाना॒न्यद्यु॒ष्माक॒मन्त॑रं बभूव। नी॒हा॒रेण॒ प्रावृ॑ता॒ जल्प्या॑ चासु॒तृप॑ उक्थ॒शास॑श्चरन्ति॥४४॥ यजु॰ १७।३१ व्याख्यान—हे जीवो! जो परमात्मा इन सब भुवनों का बनानेवाला विश्वकर्मा है, उसको तुम लोग…

092 Bhaga Eva Bhagavaan

मूल प्रार्थना भग॑ ए॒व भग॑वाँ२॥ऽ अ॒स्तु देवा॒स्ते॑न व॒यं भग॑वन्तः स्याम। तं त्वा॑ भग॒ सर्व॒ इज्जो॑हवीति॒ स नो॑ भग पुर ए॒ता भ॑वे॒ह॥४५॥ यजुः ३४।३८ व्याख्यान—हे सर्वाधिपते! महाराजेश्वर! आप “भगः” परमैश्वर्यस्वरूप होने…

093 Ganaanam Twa

मूल स्तुति ग॒णानां॑ त्वा ग॒णप॑तिꣳ हवामहे प्रि॒याणां॑ त्वा प्रि॒यप॑तिꣳ हवामहे निधी॒नां त्वा॑ निधि॒पति॑ꣳ हवामहे वसो मम। आहम॑जानि गर्भ॒धमा॑ त्वमजासि गर्भ॒धम्॥४६॥      यजु॰ २३।११ व्याख्यान—हे समूहाधिपते! आप मेरे गण=सब समूहों के पति…

094 Agne Vratapate

मूल प्रार्थना अग्ने॑ व्रतपते व्र॒तं च॑रिष्यामि॒ तच्छ॑केयं॒ तन्मे॑ राध्यताम्। इ॒दम॒हमनृ॑तात्स॒त्यमुपै॑मि॥४७॥ यजु॰ १।५ व्याख्यान—हे “अग्ने” सच्चिदानन्द, स्वप्रकाशरूप ईश्वराग्ने! ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास आदि सत्यव्रतों का आचरण मैं करूँगा, सो इस व्रत…

095 Ya Aatmada Balada

मूल स्तुति य आ॑त्म॒दा ब॑ल॒दा यस्य॒ विश्व॑ऽउ॒पास॑ते प्र॒शिषं॒ यस्य॑ दे॒वाः। यस्य॑ छा॒यामृतं॒ यस्य॑ मृ॒त्युः कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम॥४८॥ यजु॰ २५।१३ व्याख्यान—हे मनुष्यो! जो परमात्मा अपने लोगों को “आत्मदाः” आत्मा का…

096 Upahoota Iha Gava

मूल प्रार्थना उप॑हूता इ॒ह गाव॒ उप॑हूता अजा॒वयः॑। अथो॒ऽअन्न॑स्य की॒लाल॒ उप॑हूतो गृ॒हेषु॑ नः। क्षेमा॑य वः॒ शान्त्यै॒ प्र प॑द्ये शि॒वꣳ श॒ग्मꣳ शं॒योःशं॒योः॥४९॥ यजु॰ ३।४३ व्याख्यान—हे पश्वादिपते! महात्मन्! आपकी ही कृपा से उत्तमउत्तम…

097 Tameeshanam Jagatastas

मूल स्तुति तमीशा॑नं॒ जग॑तस्त॒स्थुष॒स्पतिं॑ धियञ्जि॒न्वमव॑से हूमहे व॒यम्। पू॒षा नो॒ यथा॒ वेद॑सा॒मस॑द्वृ॒धे र॑क्षि॒ता पा॒युरद॑ब्धः स्व॒स्तये॑॥५०॥ यजु॰ २५।१८ व्याख्यान—हे सुख और मोक्ष की इच्छा करनेवाले जनो! उस परमात्मा को ही “हूमहे” हम…

098 Mayeedamindra

मूल प्रार्थना मयी॒दमिन्द्र॑ इन्द्रि॒यं द॑धात्व॒स्मान् रायो॑ म॒घवानः॑ सचन्ताम्। अ॒स्माक॑ꣳ सन्त्वा॒शिषः॑ स॒त्या नः॑ सन्त्वा॒शिषः॑॥५१॥ यजु॰ २।१० व्याख्यान—हे इन्द्र परमैश्वर्यवन् ईश्वर! “मयि” मुझमें विज्ञानादि शुद्ध इन्द्रिय “दधातु” धारण करो और “रायः” उत्तम…

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