“बेंच मार्किंग” June 22, 2019 By Arun Aryaveer ”शत प्रतिशत तनिक कम नहीं“ के नारे के पश्चात स्तरीकरण या बेंच मार्र्किंग एक सही दिशा में सही कदम है। ”बेंच मार्किंग“ एक तुलनात्मक शब्द है। उच्चता मापक रेखाएं इसका एक उत्तम उदाहरण है। उच्चता मापक रेखाएं का अर्थ है समोच्च दर्शक रेखाएं। ये रेखाएं एक दूसरों को काटती नहीं हैं। काट सकती भी नहीं इनमें एक नियत अंतर हर जगह पर होता है। एक समोच्च रेखा को पूरी तरह दूसरी समोच्च रेखा तक ले जाने में एक समग्र प्रयास की जरूरत होती है। बेच मार्किंग भी इसी तरह की प्रक्रिया है। बेंच मार्किंग का अर्थ सीढ़ी हो सकता है। इसीलिए इसे स्तरीकरण के द्वारा अभिव्यक्त किया गया है। बेंच मार्किंग का अर्थ है तुलनात्मक। प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में कार्यों प्रणालियों, विधियों, उत्पादकता, प्रबंधक के विभिन्न देशों में तथा एक ही देशों में विभिन्न स्तर तथा तरीके होते हैं – इन तरीकों को क्रमशः उच्चता तथा निम्नता में श्रेणीबद्ध करना एवं उसमें अपने स्तर का मापन करना तथा स्थान निर्धारण करना स्तरीकरण या बेंच मार्किंग है। अपने स्तर के निर्धारण करने के साथ-साथ क्रमशः उच्च स्तर को प्राप्त करते जाने का प्रयास बेंच मार्किंग है। जैसा कि पूर्व में लिखा जा चुका है कि स्तरीकरण में वृद्धि या उच्चताकरण करने के लिए एक समग्र प्रयास की आवश्यकता है। समग्र प्रयास में स्तरीकरण के उच्चताकरण की महती आवश्यकता है। टुकड़ा-टुकड़ा प्रयास से बेंच मार्किंग की प्राप्ति नहीं हो सकती। बेंच मार्क समय बीत जाने के पश्चात निरस्त हो जाते हैं। टुकड़ा-टुकड़ा प्रयास में यह खतरा बराबर बना रहता है। स्तरीकरण या बेंच मार्किंग में अपनी वर्तमान स्थिति का आकलन बड़ी कठिन प्रक्रिया है। यदि इस आकलन में ही मूल त्रुटि हो जाये, जो कि प्रायः हो जाती है, तो सारी बेंच मार्किंग प्रक्रिया ही लड़खड़ा जाती है इससे स्तरीकरण हेतु की गई सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है। स्तरीकरण वह विधा है जिसमें आरंभ में कई समानांतर स्तरों का उच्चता क्रम में निर्धारण करना आवश्यक है। स्तर निर्धारण में निश्चयात्मक श्रेष्ठ बुद्धि समूह एक महत आवश्यकता है। ऐसे समूह के बिना स्तरीकरण का चूं-चूं का मुरब्बा बनकर रह जायेगा। ”किसी तरह“ इन्जीनियरिंग स्तरीकरण का मटियामेट करके रख देती है। इसी प्रकार स्तरीकरण द्वारा उपलब्धियों हेतु निम्नलिखित आवश्यकताएं हैं। 1) कम से कम तीन तथा इससे अधिक पांच या अधिक से अधिक सात स्तरों का निर्धारण है। विषम स्तर अधिक लाभप्रद है। 2) इन स्तरों में ”स्व-स्तर“ निर्धारण। स्व स्तर औसतः दूसरा होना चाहिए। 3) स्व स्तर निर्धारण निश्चयात्मक श्रेष्ठ बुद्धि स्तर समूह द्वारा हो। 4) स्तरीकरण हेतु समग्र प्रयास हो। (अ) समग्र समूह की भिज्ञता। (ब) ”मानस उफान“ विधा का प्रयोग। (स) मछली चित्र का प्रयोग। (द) पच्चीस प्रतिशत आधार समस्याओं का चयन। (ई) दशरूपकम का निर्माण। (फ) कार्य समूहों का गठन। (स) क्रियान्वयन एवं (र) पुनर्स्तरीकरण। यह बेंच मार्किंग का आधुनिक रूप है। बेंच मार्किंग एक अत्यंत आधुनिक विज्ञान है। क्या भारतीय संस्कृति बेंच मार्किंग आधारित है ? क्या सांस्कृतिक बेंच मार्किंग का स्पष्ट स्वरूप हमारे सम्मुख है ? हमारी संस्कृति में स्तरीकरण के सुसंगत सटीक उदाहरण नकारात्मक तथा सकारात्मक रूप में भी मिलते हैं। नकारात्मक स्तरीकरण में गीता का प्रसिद्ध क्रम (1) विषय ध्यान से, (2) संग – इच्छा से, (3) काम भाव से, (4) क्रोध से, (5) संमोह से, (6) स्मृति भ्रंश से, (7) बुद्धि नाश से सर्वनाश यह एक नकारात्मक स्तरीकरण है। इसी प्रकार सांख्य दर्शन पूरा का पूरा स्पष्टतः स्तरीकरण या बेंच मार्किंग है। चौबीस तत्त्वों में पुरुष सर्वोच्च स्तर है। योग दर्शन में अष्टांग योग एक सकारात्मक स्तरीकरण है। पांच यम, पांच नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि यह एक निश्चयात्मक बुद्धि स्तरीकरण है। इसमें समाधि अवस्थाओं का, सिद्धि अवस्थाओं का विभाजन भी स्तरीकरण या बेंच मार्किंग है। पांच सिद्धियां हैं- (1) जन्मजा, (2) औषध्ािजा, (3) मंत्रजा, (4) तपोजा एवं (5) समाधिजा। इन सिद्धियों के क्रम में भी स्तरीकरण बेंच मार्किंग है। देवताओं के क्रम द्युस्थानीय, अन्तरिक्ष स्थानीय, पृथवीस्थ भी स्तरीकरण है। त्रिगुणों में सत, रज, तम स्तरीकरण है। वाक् में परा पश्यंती, मध्यमा, वैखरी स्तर है। वाक् स्तर अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके स्तरों के अनुसार मानवों का विभाजन भी किया जा सकता है। परा, पश्यंती, मध्यमा, वैखरी स्तरों तक की गहराई के आदमी संसार में मिलते हैं। ये स्तर क्रमशः उन्नति के स्तर हैं। सांस्कृतिक स्तरीकरण या बेंच मार्किंग का उत्कृष्ट उदाहरण है पांच कोष। अन्नमय कोष की साधना पश्चात सिद्धि में ऐसा प्रतीत होता है कि अन्न ही ब्रह्म है, पर ऋषि के इस सिद्धि पर निर्देश है कि तप कर तप कर। प्राणमय कोष की तत्पश्चात की गई साधना के उपरान्त प्रतीत होता है कि प्राणमय कोष ही ब्रह्म है। इसके पश्चात तप करने पर मनोमय कोष; मनोमय कोष से विज्ञानमय कोष तथा विज्ञानमय कोष से आनंदमय कोष का अस्तित्व है। इस प्रकार ये पांचों कोषों में स्पष्टतः पांच स्तर या बेंच मार्क उपलब्ध हैं। प्रकृति जीव ब्रह्म की बेंच मार्किंग सत, सतचित, सतचितआनंद द्वारा स्पष्टतः अभिव्यक्त है। इसी प्रकार त्रिवाणियां सप्त स्वर, सप्त स्तर, पांच सोपान, पंच समूह, अष्ट चक्र, नवधाभक्ति, चौदह भुवन, आदि आदि सांस्कृतिक बेंच मार्किंग हैं। सांस्कृतिक दृष्टि से बेंच मार्किंग एक अन्य तरीके से भी आधुनिक विज्ञान को उपयोगी हो सकती है। संस्कृति वर्तमान प्रबंधन विधाओं के सर्वोच्च बेंक मार्क या स्तर देती है। हम संक्षेप में वर्तमान प्रबंधन विधाएं एवं उसके सर्वोच्च बेंच मार्क यहां दे रहे हैं- क्रमांक आधुनिक विधा सांस्कृतिक सर्वोच्च बेंक मार्क संदर्भ 1. परियोजना प्रबंधन अधिकारिक, पताका, प्रक्ररी, पांच संधियां, 63 उप संधियां, पांच दशरूपकम् (पर्ट) ब्रिटिश तथा अवस्थाएं, पांच प्रकृतियां, अद्भुत समावेश, पताका स्थानक (भविष्य अमेरिकन विधा आंकलन), प्रक्ररी स्थानक, चार नायक, तीन उत्पाद्य-ऐतिह्य-मिश्र प्रारूप आदि निर्मित हर परियोजना पर लागू किया जाने वाला परियोजना प्रबंधन प्रारूप = दशरूपकम्। 2. कार्य समूह (जापानी विधा) संगठन सूक्त – तेइस तत्व ऋग्वेद 10/191 3. पर्यावरण शान्ति-मंत्र – सत्रह तत्व यजुर्वेद 36/17 (रियो, हेलसेंकी सम्मेलन) द्यौ शान्ति, अंतरिक्ष शान्ति, शान्ति पृथिवी, शान्ति औषधयः, शान्ति वनस्पतयः, शान्ति विश्वे देवा, शान्ति ब्रह्म, शान्ति सर्वम्, शान्तिः एव शान्ति, सामा शान्तिरेधि, शान्ति, शान्ति, शान्ति। 4. औद्यौगिक स्वास्थ्य पश्येम शरदः शतम्, जीवेम शरदः शतम्, शृणुयाम शरदः शतम्, यजुर्वेद 36/24 (वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन) प्रब्रवाम शरदः शतम्, अदीनाः स्याम शरद् शतम्, भूयश्च शरदः शतात्। बुध्येम शरदः शतम्, रोहेम शरदः शतम्। 5. कार्य परिस्थितिकी यथाहान्यनुपूर्व भवन्ति यथ ऋतव ऋतुभिर्यन्ति साधु। ऋग्वेद (इर्गोनॉमिक्स) यथा न पूर्वमपरो जहात्येवा धातरायूंषि कल्पयैषाम्।। 10/18/5 6. सुरक्षा (1) बोध, (2) प्रतिबोध, (3) स्वप्न रहित अवस्था, अथर्व.1/8/13 कारखाना अधिनियम (4) स्थिरता, (5) इन्द्रिय चेतन्यता। स्व. डॉ. त्रिलोकीनाथ जी क्षत्रिय पी.एच.डी. (दर्शन – वैदिक आचार मीमांसा का समालोचनात्मक अध्ययन), एम.ए. (दर्शन, संस्कृत, समाजशास्त्र, हिन्दी, राजनीति, इतिहास, अर्थशास्त्र तथा लोक प्रशासन), बी.ई. (सिविल), एल.एल.बी., डी.एच.बी., पी.जी.डी.एच.ई., एम.आई.ई., आर.एम.पी. (10752) Leave a Reply Cancel replyYour email address will not be published. Required fields are marked *Comment * Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.