११- ब्राह्मण March 20, 2020 By Arun Aryaveer Download ११- ब्राह्मण ब्राह्मणों ने कीनी ब्रह्मविद्या को विदेशपार। अविद्या अज्ञान को अंधार जापे आयो है।। विद्यादान ध्यान-धर्म ब्रह्म को न जान्यो मर्म। पाचकों को कर्म एक विप्र-मनभायो है।। वेद को न लखो भेद परस्पर भयो भेद। सीमन्त प्रेतान्न-श्राद्ध खंत हु से खायो है।। नहीं नेक टेक एक वर्ण में विवेक रेख। देख देख दिल दयानन्द को दुखायो है।।११।। ~ दयानन्द बावनी स्वर : ब्र. अरुणकुमार “आर्यवीर” ध्वनि मुद्रण : कपिल गुप्ता, मुंबई