०७- संन्यास March 20, 2020 By Arun Aryaveer Download ०७- संन्यास दूर देहाभ्यास किया सानन्द संन्यास लिया। तीव्र आत्मप्यास वेदाभ्यास ते बुझाय के।। भए मूलशंकर से दयानन्द सरस्वती। योग की जगाई ज्योत हिमाद्रि को जाय के।। हिंसक पशुन बीच काय को झुकाय दीनो। आत्मवत् भूतेषु को प्रेममन्त्र पाय के।। काराणी कहत तप त्याग ज्ञान ध्यानहु से। वृत्तियों को वश कीनो तन को तपाय के।।७।। ~ दयानन्द बावनी स्वर : ब्र. अरुणकुमार “आर्यवीर” ध्वनि मुद्रण : कपिल गुप्ता, मुंबई