०१- ओम्कार महिमा March 20, 2020 By Arun Aryaveer Download दयानन्द बावनी कवि दूलेराय काराणी वन्दु मात सरस्वती सुखदात्री सुखकंद। वंदन भगवती भारती दिया है दयानन्द।। ०१- ओम्कार महिमा अरूपी अकाम परिपूर्ण प्रेम-धर्म-धाम। आदि में अनादि नाम एक ओंम्कार का।। अखण्ड अखेद जाको वेद ने न पायो भेद। अभेद अच्छेद निराकार निर्विकार का।। भारत में ओही ओम्कार का जगानेवाला। प्रकटा पुरुषवर तारक संसार का।। काराणी कहत भाग्यवन्त आर्यभूमि तूने। पाया है प्रसाद दयानन्द के दीदार का।।१।। ~ स्वर : ब्र. अरुणकुमार “आर्यवीर” ध्वनि मुद्रण : कपिल गुप्ता, मुंबई