गृहस्थ धर्म परिचायिका

लेखक स्व. डॉ. त्रिलोकीनाथ जी क्षत्रिय सम्पादक ब्र. अरुणकुमार ‘‘आर्यवीर’’ आर्यवीर प्रकाशन 7666986837, 8074872028 E-mail : 1aryaveer@gmail.com विवाह अ) विद्या, विनय, शील, रूप, आयु, बल, कुल, शरीरादि का परिमाण यथायोग्य…

घेरों को घेर दो उन्मुक्त हो ही जाओगे..!!

एषणा सबसे बड़ा घेरा है। एषणाओं में वित्तेषणा, पुत्तेषणा, यशेषणा के त्रि हैं। त्रि एषणाओं के घेरे को घेरना उन्मुक्ति का पहला चरण है। वर्तमान धर्म जो वास्तव में सम्प्रदाय…