गृहस्थ धर्म परिचायिका लेखक स्व. डॉ. त्रिलोकीनाथ जी क्षत्रिय सम्पादक ब्र. अरुणकुमार ‘‘आर्यवीर’’ आर्यवीर प्रकाशन 7666986837, 8074872028 E-mail : 1aryaveer@gmail.com विवाह अ) विद्या, विनय, शील, रूप, आयु, बल, कुल, शरीरादि का परिमाण यथायोग्य…
मृत्यु यदि जीवन से लबालब भरे जीवन्त साधक को अचानक निर्णायक मण्डल से प्रतिभागियों के ही अनुरोध पर सिर्फ दो मिनट”प्रतियागिता में प्रतियोगी के रूप में भाग लेने को कहा जाए…
घेरों को घेर दो उन्मुक्त हो ही जाओगे..!! एषणा सबसे बड़ा घेरा है। एषणाओं में वित्तेषणा, पुत्तेषणा, यशेषणा के त्रि हैं। त्रि एषणाओं के घेरे को घेरना उन्मुक्ति का पहला चरण है। वर्तमान धर्म जो वास्तव में सम्प्रदाय…
अष्टाध्यायी प्रवेश जिस प्रकार सुदृढ़ आधार पर न बना हुआ पर्याप्त दीर्घ ऊँचा एवं सुन्दर भवन भी जीवन के लिए संशयात्मक ही रहता है। इसी प्रकार मूलभूत व्याकरण के तत्त्वों को पूर्व…
पाणिनीयाष्टाध्यायीसूत्रपाठः (अनुवृत्ति अधिकार सहित) आर्ष क्रम से व्याकरण पठन-पाठन के सौकर्य हेतु ऋषि पाणिनि द्वारा रचित अष्टाध्यायी सूत्रपाठ को अनुवृत्ति अधिकार सहित इस पुस्तक के रूप में टंकित करने का सौभाग्य मुझे ईश्वर की…