“गायत्री साधना” ओ३म् – ब्रह्म पंचेक है ब्रह्म – पंचिकत्वा – पंचेकवान – पंचेकवान – पंचेकथा – पंचेक दा – पंचेक पा – यह मैं – पंचेक भरा – सर्वत्र पवित्र। भूः:…
“मेधामय” यां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते। तया मामद्य मेधयाऽग्ने मेधाविनं कुरु।। (यजु.32/14) पृथ्वी, आप, वरुण, अग्नि, आकाष, खम् और ऋच ये सप्त देव गण दस-दस देव गुणों का मुझमें गन्ध, रस, रूप,…
“अन्तर्रस साधना” भावातीत ध्यान अनुगुणित तैंतीस रस देवताओं को अप्रत्यक्ष प्रभावित करता है। पर उसके परिणाम भी प्रभावशील हैं। अन्तर्रस साधना जिसे रसन भावातीत भी कहा जा सकता है सीधी लार उत्पादक…
यम-नियम कानून और अपराध यम पांच हैं नियम पाच हैं। कानून ढेर से हैं। अपराध अनेक हैं। क्या इन तीनों मे कोई अन्तर्सम्बन्ध है ? इस पर गहन चिन्तन मनन करने की आवश्यकता है।…
“ससीम विज्ञान- असीम अध्यात्म” विशेष ज्ञान का नाम विज्ञान है। बुद्धिमत्ता, ज्ञान, विज्ञान के समन्वय पर ऊँचाई-गहराई का अन्त्य छोर पाना अध्यात्म है। प्राकृतिक नियमों की खोज तथा विष्लेषण करना विज्ञान है। प्राकृतिक, सामाजिक,…
“पूजा” प्रश्न : पूजा किसकी की जाती है ?उत्तर : पूजा देवताओं की की जाती है। प्रश्न : देवता कितने प्रकार के हैं ?उत्तर : मूल देवता तीन प्रकार के हैं…
वैदिक त्रैतवाद ।। ओ३म् ।। ईश्वर-जीव-प्रकृति सृष्टि के तीन तत्त्व ओ३म् शन्नो मित्रः शं वरुणः शन्नो भवत्वर्यमा। शन्न इन्द्रो बृहस्पतिः शन्नो विष्णुरुरुक्रमः।। नमो ब्रह्मणे नमस्ते वायो त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि। त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म…