३३- निस्पृहता March 20, 2020 By Arun Aryaveer Download ३३- निस्पृहता उदेपुर राजन सज्जनसिंह ने एक समय। स्वामीजी को बात एक बताई ईनाम की।। महर्षि न कीजे मूर्तिपूजा का विरोध अब। लीजीए जागीर आप एकलिंगधाम की।। सारे धर्म-धामहु के बनादूं महन्त बड़े। और भी दिलाऊं जायदाद लाख दाम की।। महर्षि कहत वेद-धर्म के विरुद्ध यह। तुच्छ जायदाद न हमारे कुछ काम की।।३३।। ~ दयानन्द बावनी स्वर : ब्र. अरुणकुमार “आर्यवीर” ध्वनि मुद्रण : कपिल गुप्ता, मुंबई