अनुवाद कला पाठ १ November 10, 2019 By Arun Aryaveer अभ्यास १ १. हम ईश्वर को नमस्कार करते हैं और पाठकों का मङ्गल चाहते हैं |= वयम् ईश्वरम् वन्दामहे पाठकानां च अरिष्टम् अभिलषामहे | २. राजा दुष्टों को दण्ड देता है और मर्यादाओं कि रक्षा करता है |= राजा दुष्टान् दण्डयति मर्यादा: च रक्षति | ३. विनय विद्या को सुशोभित करता है और क्षमा बल को |= विनय: विद्यां सुशोभयति क्षमा च बलम् | ४. इन विद्यार्थियों कि संस्कृत में रुचि हि नहि अपितु लगन भी है |= एतेषां विद्यार्थीनाम् संस्कृते केवलं रुचिरेव न अपितु आसक्तिरप्यस्ति | ५. वें शास्त्रों का चाव से परिशीलन करते हैं और सन्मार्ग में रहते हैं |= ते शास्त्राणि अभिरुच्या परिशीलयन्ति सन्मार्गं च अभिनिविशन्ते | ६. यति परमेश्वर का ध्यान करता है और तपस्या से पाप का क्षय करता है |= यति: परमेश्वरं ध्यायति तपसा च पापं दूरी करोति | ७. राम ने शङ्कर के धनुष को तोडकर सीता से विवाह किया |= राम: शाङ्करं धनु: आनमय्य सीतां पर्यणयत् | ८. धाया दूधमुहे बच्चे के वस्त्रों को धोती है |= धात्री स्तनन्धयस्य वस्त्राणि धावति | ९. छात्रों ने उपाध्याय को देखा और झुककर चरणों में नमस्कार किया |= उपाध्यायं दृष्ट्वा छात्रा: चरणयो: प्रण्यपतन् | १०. मनोरमा ने गीत गाया और सारे होल में सन्नाटा छा गया |= मनोरमा च गीतं प्रागायत् सभा च प्राशाम्यत् | ११. तुम दोनों ने अवश्य ही अपराध किया है | तुम्हारा इनकार कुछ अर्थ नहीं रखता |= अवश्यमेव अपराद्धं युवाभ्याम् | अनर्थकं युवयोः प्रतिषेध: | १२. विश्वामित्र ने चिरकाल तक तपस्या कि और ब्राह्मणत्व को प्राप्त किया= विश्वामित्र: चिरं तपश्चचार ब्राह्मणत्वं च जगाम | १३. वह मालती के पुष्पों को सूंघता है और ताजा हो जाता है |= स च मालतीपुष्पाणि जिघ्रति नवश्च भवति | १४. मैं गौ को ढूढ रहा हू , नहीं मालूम किस और निकल गयी है |= अहं गां मृगये न जाने कां दिशं प्रति निरगच्छत् | १५. वह घोडे से गिर गया , इससे उसके सर पर चोट आई |= स: अश्वात् पतित: अत: तस्य शिरोघात: जात: | १६. मेरे पास पुस्तक नहीं है , मैं पाठ कैसे याद करुं ?= मे पुस्तकं नास्ति पाठं कथं स्मराणि ? १७. तू नरक को जायेगा , तू गुरुओं का तिरस्कार करता है |= त्वं नरकगामी भविष्यसि यद् गुरून् अवजानासि | १८. वे माता पिता की सेवा करते हैं , अत: सुख पाते हैं |= ते पितरौ सेवन्ते अत: सौख्यं लभन्ते | १९. ब्रह्मचारी गुरु से आज्ञा पा जङ्गल से समिधा लाते हैं |= ब्रह्मचारिण: गुर्वाज्यां प्राप्य वनात समिधः आवहन्ति | २०. बच्चा अग्नि में हाथ डाल देता है और माता उसकी और दौडती है |= वटु: अनले हस्तप्रक्षेपं करोति माता च तं प्रति धावति | Leave a Reply Cancel replyYour email address will not be published. Required fields are marked *Comment * Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.